ग्रंथों के विचार तो आकाश से नीचे नहीं गिरते। अतः मैं और आप जैसे अन्यों को चाहिए कि वे जो वचन सयुक्तिक होगा, उसका स्वीकार करें।
- विष्णु पुराण, चार्वाक दर्शन की शास्त्रीय समीक्षा
समझदार व्यक्ति को चाहिए कि वह इस दुनिया में प्रायः कृषि, गोरक्षा, व्यापार, दंड नीति आदि प्रत्यक्ष सिद्ध मार्गों द्वारा ही सुखोपभोगों का अनुभव ले।
- शंकराचार्यकृत सर्वसिद्धांतसंग्रह
विषयों के संपर्क द्वारा निर्माण होनेवाला सुख दुःख के साथ मिश्रित हो जाने से लोगों को चाहिए कि वे उसका त्याग करें, यह मूखों का विचार हुआ। अपने हित की इच्छा करनेवाला कौनसा मनुष्य धवल तथा उत्तम चावल का धान छिलकों से ढंका है, इसलिए फेंक देना चाहेगा?
- सर्वदर्शनसंग्रह - चार्वाक दर्शन